संस्थान ने वर्ष 2019 में अपने 100 वर्ष पूर्ण किए, और हम राष्ट्र निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के साथ नए उत्साह, ऊर्जा और समर्पण के साथ इस गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाने के लिए संकल्पित हैं। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय), वाराणसी का अस्तित्व भारत रत्न महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी के दूरदर्शी विचारों का परिणाम है, जो आधुनिक भारत के प्रथम आवासीय विश्वविद्यालय, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के संस्थापक थे। उन्होंने स्वतंत्र भारत को सशक्त बनाने में तकनीकी शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका को पहले ही समझ लिया था। बीएचयू में अभियंत्रण शिक्षा की शुरुआत वर्ष 1919 में बनारस इंजीनियरिंग कॉलेज (BENCO) की स्थापना के साथ हुई। इसके बाद विकास के अगले चरण में कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी (TECHNO) तथा कॉलेज ऑफ माइनिंग एंड मेटलर्जी (MINMET) की स्थापना हुई।
वर्ष 1968 में बीएचयू के तत्कालीन इंजीनियरिंग कॉलेजों—BENCO, MINMET और TECHNO—को मिलाकर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IT-BHU) का गठन किया गया। वर्ष 1972 से IT-BHU में प्रवेश भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों द्वारा आयोजित संयुक्त प्रवेश परीक्षा (JEE) के माध्यम से होने लगा। पूर्व IT-BHU देश के प्रमुख अभियंत्रण संस्थानों में निरंतर उच्च स्थान पर रहा है। 29 जून 2012 को संसद के एक अधिनियम के माध्यम से IT-BHU को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी बीएचयू), वाराणसी का दर्जा प्राप्त हुआ।आईआईटी में रूपांतरण के पश्चात संस्थान ने शीघ्र ही आईआईटी के मानकों के अनुरूप प्रक्रियाएँ और कार्यप्रणालियाँ स्थापित कर ली हैं।
Dr. V. Ramanathan
Associate Professor
Department of Chemistry, IIT BHU
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Area of Interest:
Laser Spectroscopy, Raman Spectroscopy and Imaging, Computational chemistry